नीला पीला लाल गुलाबी, रंग लिए आयी टोली । फिर फागुन की धूम मची है, लो फिर आयी है होली ।। बैर द्वेष मन की कटुता पर, रंग डालकर प्यार भरे, नफरत डाह जलन के सारे, कूप सुखाकर खार भरे, स्नेह प्रीति के रंग उडाती, नभ पर छायी है होली । फिर फागुन की धूम मची है................. नव कलिकाओं ने भी खिलकर, रंग बाग़ में घोल दिए, अलि गुन्जन पर थिरक उठी हैं, द्वार हृदय के खोल दिए, बिखराया मकरंद हवा ने, सौरभ लायी है होली । फिर फागुन की धूम मची है............... ...